Submits By : Harsh Nath Jha
खेल कुदरत के साथ है,  तुम कितनी  देर टिक सकोगे?  यह हलाहल  तुल्य विष है , तुम कब तक पी सकोगे ?  चुनौती तुमने दी है माँ को, ...
यह जीवन हो तुझको अर्पण माँ ,तूने पालकर बड़ा किया I  उस देव  तुल्य  शैशवावस्था में , गोदी  में  तेरी दूध  पिया II   धन्य  समझता आज  ...
2020-06-02
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2020-06-02