Delhi Hinsa, इनका क्या कसूर था की इन्हे मारा गया। न तो ये दंगे में शामिल थे ना हीं किसी के खिलाफ कोई आवाज़ उठाये थे, इनका सिर्फ एक हीं कसूर था की ये रोजी रोटी और काम के तलाश में दिल्ली आये थे। Delhi Violence, बीते चार दिन में मारे गए लोगों की हर कहानी से दर्द का सागर फूटता है। गुरु तेग बहादुर अस्पताल के शव गृह के बाहर बुधवार को इनके परिजनों की कभी रुलाई फूटती है तो कभी बहुत देर तक सन्नाटा छा जाता है। हर तरफ गम, गुस्सा और शोर का माहौल था। मरने वालों के परिजनों की आंखों में आंसूकी जगह सवाल हैं। आखिर किसके लिए किसको मार दिया? सुना तो यह था कि दिल्ली सबकी है। एक पिता की चीत्कार में डूबी आवाज गूंजती है भइया, गांव में ही मजूरी कर लेते, काहे दिल्ली आए।
2020-02-27
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